खेलों का महत्व- short essay in Hindi

प्रत्येक बालक के लिए खेलों का बहुत बड़ा महत्व है। खेल के बिना बच्चों का जीवन अधूरा है।

सारे बच्चे कुछ न कुछ अवश्य खेलते है। माता-पिता भी बच्चों को खुश करने के लिए उनकी अवस्था अनुसार उनके लिए खिलौने लाते हैं।

क्यूँकि खेलों का बहुत बड़ा महत्व है।

पढ़ाई और खेल का गहरा सम्बन्ध है।खेल के बिना पढ़ाई अधूरी है और पढ़ाई के बिना खेल अधूरा है।

इसलिए एक बालक के लिए खेल व पढ़ाई दोनों ज़रूरी हैं।

विद्यालयों में भी पढ़ाई के साथ साथ बच्चों को खेलों का अभ्यास कराया जाता है।

यद्यपि मनुष्य के लिए मनोरंजन के कई साधन हैं। परंतु उनमें खेल, मनोरंजन का प्रमुख साधन हैं।

मनोरंजन के लिए बचपन से ही उन्हें खिलौने दिए जाते हैं। जब बच्चा पढ़ाई से ऊबने लगता है। उस समय भी खेल खेलने  से उसका मन बहल जाता है।

मनोरंजन करने के बाद वह मन लगा कर पढ़ता है।

खेल खेलने से शरीर के अंग संचालित होते हैं और उनमें खून तेज़ी से दौड़ने लगता है।

खेलने से बच्चों को अधिक भूख भी लगती है। उनका भोजन शीघ्र पचने लगता है। जिससे उनका स्वास्थ्य भी बहुत अधिक होता है।

खेलने से बालक का शरीर सुडौल व सुंदर बन जाता है। उसके शरीर का गठन बढ़िया बनने लगता है।

जितने भी बच्चे आपस में खेलते है वे जल्दी ही एक दूसरे के बहुत अच्छे दोस्त बन जाते है।

खेल के द्वारा हमारी पहचान बढ़ती है। एक विद्यालय के छात्र दूसरे विद्यालय के छात्रों के साथ खेलते हैं।

उनका आपस में प्रेम बढ़ता है। खेल हारने या जीतने पर भी प्रेम घटता नहीं है, बल्कि बढ़ता है।

कई बच्चे दिन भर पढ़ते नहीं है, बल्कि दिन भर खेलते रहते है।

वे न तो पढ़ाई करते हैं और न ही घर वालों को उनके काम में सहयोग देते है।

ऐसे बच्चे खेल का दुरुपयोग करते है।

 

 

 

 

 


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