प्रातःकाल के भ्रमण का महत्व-short essay in Hindi 

भ्रमण करना एक प्रकार का उत्तम व्यायाम है। आजकल आने जाने के साधन बढ़ने से आदमी को चलने का कम अवसर मिलता है।

वह एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए किसी न किसी वाहन का प्रयोग करता है।

इसलिए अच्छे स्वास्थ्य के लिए भ्रमण करना बहुत ज़रूरी है।

भ्रमण करने के लिए प्रातः काल का समय सबसे बढ़िया होता है क्यूँकि उस समय शुद्ध हवा बहती है।

सूर्य उदय होने से पहले (जब उजाला भी अच्छी प्रकार से नहीं हुआ हो) समय का वातावरण बहुत सुहावना होता है।

शुद्ध व शीतल हवा बहती है। चारों ओर पक्षी चहचहाते हैं। पूर्व दिशा में लालिमा छाई रहती है।

चाँद व तारे अस्त होने लगते हैं। इस समय यदि आदमी बाहर निकलता है तो उसका मन बड़ा खुश हो जाता है।

जिस प्रकार हम सबको शुद्ध भोजन व शुद्ध पानी चाहिए।

उसी प्रकार हमें हवा भी शुद्ध चाहिए

दिन भर हवा में धूल, कीटाणु व दुर्गन्ध का धुआँ फैला रहता है। इस तरह की हवा से हमारे फेफड़ों को नुक़सान पहुँचता है।

प्रातःकाल की हवा बिल्कुल शुद्ध होती है। इससे हमारे फेफड़ों की सफ़ाई होती है।

उनमें भरी अशुद्ध हवा बाहर निकल जाती है। इसलिए शुद्ध वायु के सेवन के लिए प्रातःकाल का भ्रमण उत्तम है।

प्रातः काल भ्रमण के लिए स्थान भी उपयुक्त होना चाहिए।

बगीचा व वन इसके लिए सर्वोत्तम स्थान हैं।

यदि यह उपलब्ध नहीं होते हैं तो उन स्थानों में घुमना चाहिए जो खुले है।

तंग गली व गंदे नालों के पास घुमना हानिकारक है।


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