कबड्डी- short essay in Hindi

खेल बहुत प्रकार के होते हैं। कहा जाता है कि कई प्रमुख खेल भारत में बाहर से आए है।

लेकिन कबड्डी एक भारतीय खेल है। इसका जन्म भारत में ही हुआ है।

अब यह खेल अन्य देशों में भी खेला जाता है। मैं कबड्डी खेलने में बहुत अधिक रुचि लेता हूँ।

कबड्डी सर्वसाधारण खेल है। इसको प्रत्येक स्वस्थ आदमी सरलता से खेल सकता है।

जिस खेल में जितने कम साधनों की आवश्यकता होती है, उसकी उतनी ही अधिक उपयोगिता होती है।

इस खेल के लिए खिलाड़ी व मैदान के अतिरिक्त अन्य साधनों की कोई आवश्यकता नहीं होती है।

कही पर भी कितने ही लोग मिल कर दो दलों में बंट कर कबड्डी खेल सकते हैं और अपना मनोरंजन कर सकते हैं।

यह ज़्यादातर गरीब बच्चों का खेल है। क्यूँकि उनके पास अन्य खेलों को खेलने के लिए साधन उपलब्ध नहीं होते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में इस खेल का बहुत प्रचलन है।

गाँवों में कबड्डी व कुश्ती खूब खेले जाते हैं।

इसके नियम बड़े रोचक होते हैं। किसी भी मैदान को दो भागों में बाँटा जाता है।

उसके बीचों-बीच में रेखा खिंची जाती है।उसको पाला कहते हैं। कबड्डी में पाले का बहुत महत्व होता है।

सारा खेल पाले (रेखा) पर आधारित है। मैदान के दोनों भागों में दल खड़े हो जाते हैं।

खिलाड़ियों की संख्या के बारे में कोई निश्चित नियम नहीं है।

वैसे बड़े स्तर पर प्रत्येक दल में सात-सात खिलाड़ी होते हैं।

एक दल का खिलाड़ी दूसरे दल के खिलाड़ियों के सामने कबड्डी-कबड्डी करते हुए जाता है।

उस दल के किसी भी खिलाड़ी को छू कर वापस आ जाता है।

तो उसका एक अंक बन जाता है तथा छुआ हुआ खिलाड़ी आउट हो जाएगा।

यदि उसको विपरीत दल ने अपने पाले में ही पकड़ लिया।

तो उस दल का एक अंक हो जाता है तथा पकड़ा हुआ खिलाड़ी आउट हो जाता है।

इस प्रकार जिसके अधिक अंक होते हैं वह दल विजयी घोषित किया जाता है।

 

 

 

 


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