पेंसिल की कहानी- moral story in Hindi 

एक बार की बात है, एक गाँव में सोनू नाम का एक लड़का रहता था| लेकिन एक दिन वह बहुत परेशान था क्योंकि उसने अपनी हिंदी की परीक्षा में खराब प्रदर्शन किया था।

इसी वजह से वह अपने कमरे में अकेला बैठा हुआ था तभी उसकी दादी ने आकर उसे दिलासा बंधाया। उसकी दादी उसके पास बैठ गई और उसे एक पेंसिल दी।

सोनू ने हैरान होकर अपनी दादी की ओर देखा और दुखी मन से कहा कि वह हिंदी की परीक्षा में अपने प्रदर्शन के बाद इस पेंसिल के लायक नहीं है।

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यह सुनकर उसकी दादी ने उसे प्यार से समझाते हुए कहा कि तुम इस पेंसिल से बहुत सी चीजें सीख सकते हो क्योंकि यह बिल्कुल आप ही की तरह है।

यह भी एक दर्दनाक तीक्ष्णता का अनुभव करती है, ठीक उसी तरह जैसे तुमने अपनी परीक्षा में अच्छा नहीं करने के दर्द का अनुभव किया है।

हालांकि, यह तुमको एक बेहतर और मेहनती छात्र बनने में मदद करेगी। जिस तरह पेंसिल से जो अच्छाई आती है वह उसके भीतर से होती है, उसी तरह तुम भी इस बाधा को दूर करने की ताकत अपने भीतर से ही पाओगे।

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और अंत में, जैसे यह पेंसिल किसी भी सतह पर अपनी छाप छोड़ देती है, वैसे ही तुम भी अपनी पसंद की किसी भी चीज़ पर अपनी छाप छोड़ सकते हो।

अपनी दादी की बातें सुनकर सोनू को बहुत सांत्वना मिली और उसने खुद से वादा किया कि वह अभी से बहुत महेनत करेगा और अपनी परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करेगा।

शिक्षा:

हम सब में इतनी ताकत होती है कि जो हम बनना चाहते हैं वो हम बन सकते है।

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