रामा घोड़ा प्रशिक्षक – moral story in Hindi

एक बार की बात है, विजयनगर राज्य में एक व्यक्ति अरब से घोड़ों का जहाज लेकर आया। राजा कृष्णदेवराय के दरबार में कई लोगों ने उस व्यक्ति से अरबी घोड़े खरीदे।

यह देखकर रामा ने कहा कि विजयनगर के घोड़े अरब के घोड़ों से श्रेष्ठ है। अरब के घोड़ों को खरीदने वाले मंत्रियों ने रामा को घुड़दौड़ में इस बात को साबित करने की चुनौती दे दी।

दरबारियों ने अपने घोड़ों को प्रशिक्षित करने के लिए बहुत प्रयास किये। उन्होंने अपने घोड़ों को अच्छी तरह से खिलाया कि वे मजबूत और मजबूत हो जाये।

अच्छी व बुरी संगती- moral story in Hindi

दौड़ के दिन, सभी दरबारी अपने-अपने घोड़ों को दौड़ के मैदान में ले आये। उन्होंने अपने घोड़ों की सवारी करने के लिए अच्छी तरह से प्रशिक्षित घोड़ सवारी नियुक्त किए थे।

रामा भी अपने घोड़े को ले आया जो देखने में दुबला और पतला लग रहा था। उसे बहुत भूख लगी थी, मानो उसने कई दिनों से कुछ नहीं खाया हो।

रामा ने दौड़ के मैदान में यह घोषणा की कि वह स्वयं अपने घोड़े की सवारी करेगा। सभी घोड़ों को मैदान में अपने-अपने घोड़ सवारों के साथ पंक्तिबद्ध किया गया था।

रामा अपने भूखे-प्यासे घोड़े पर बैठ गया। उनके हाथ में एक लंबा डंडा था। उन्होंने अपनी लाठी के एक सिरे पर घास का एक गट्ठर बाँधा हुआ था।

रामा ने दूसरे छोर से छड़ी पकड़कर घोड़े के सामने घास लटका दी। घोड़ा खाना हथियाना चाहता था। इसलिए वह तेजी से भागा। लेकिन वह कितनी भी तेज दौड़े, घास उसकी पहुंच से बाहर ही रही।

जासूसी रामा – moral story in Hindi

घोड़ा तब तक और तेज गति से दौड़ता रहा जब तक कि वह अंतिम लाइन को पार नहीं कर गया, दौड़ में प्रथम आ गया। रामा ने अपने घोड़े को गले लगाया और उसे हरी हरी घास खिलाई।

जब रामा पुरस्कार लेने गया तो राजा ने उससे उसकी सफलता का रहस्य पूछा। “सफलता के लिए भूख होनी चाहिए, महाराज,” रामा ने कहा, “केवल तभी कोई सफल होगा।”

शिक्षा:

किसी भी सफलता के लिए हमें ताकत की नहीं बल्कि बुद्धि की ज़रूरत होती है|

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