स्वामी दयानंद सरस्वती- essay in Hindi 

Swami Dayananad Saraswati ji- Hindi me nibandh

स्वामी दयानंद सरस्वती आर्य समाज के संस्थापक थे| वे एक महान समाज सुधारक थे| उनका जन्म इस भूमि में तब हुआ, जब यह देश गुलाम था|

लोग बिल्कुल दीन हीन हो चुके थे| समाज में कई कुरीतियां फैल रही थी| धर्म के नाम पर आडंबर का ही बोलबाला था|

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उन्होंने उस समय जन्म लेकर इन सब के विरुद्ध अपनी आवाज उठाई और लोगों को एक सच्चा रास्ता दिखाया| वह सत्य ज्ञान की प्राप्ति के लिए कई तीर्थों व आश्रमों में भ्रमण करते रहे|

अंत में स्वामी व्रजानन्द जी ने उन्हें सत्य ज्ञान का बोध कराया| उनका नाम दयानंद सरस्वती रखा गया| 

उनके गुरु ने उन्हें समाज सुधार के लिए धर्म प्रचार करने का आदेश दिया| वे तुरंत समाज सुधार के कार्य में जुट गए| 

स्वामी जी ने देखा कि जब तक समाज से कुरीतियों व आडंबर को दूर नहीं किया जाता, तब तक समाज की उन्नति नहीं हो सकती है| 

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उन्होंने छुआ-छूत का विरोध किया| बाल-विवाह, दहेज प्रथा को समाज के लिए घातक बताया| धर्म के नाम पर चल रहे पाखंड को दूर किया| 

कुरीतियों व रूढ़ियों का विरोध किया| इन सब कार्यों के लिए उन्होंने आर्य समाज नामक संगठन की स्थापना की| 

अंत में इन्हीं कुरीतियों के विरुद्ध लड़ते हुए उन्हें विष दिया गया और उनका स्वर्गवास हो गया| 

स्वामी जी के दिखाए हुए रास्ते को प्रत्येक भारतवासी कभी भी नहीं भूल सकता है| 

Swami Dayananad Saraswati ji essay in Hindi


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